श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 1: आदि-खण्ड  »  अध्याय 10: श्री लक्ष्मीप्रिया के साथ विवाह  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  1.10.105 
যথা-বিধি-রূপে কন্যা করি’ সমর্পণ
আনন্দ-সাগরে মগ্ন হৈলা ব্রাহ্মণ
यथा-विधि-रूपे कन्या करि’ समर्पण
आनन्द-सागरे मग्न हैला ब्राह्मण
 
 
अनुवाद
अपनी पुत्री को भगवान को विधिपूर्वक अर्पित करने के बाद, ब्राह्मण आनंद के सागर में लीन हो गया।
 
After offering his daughter to the Lord as per the rituals, the Brahmin merged into the ocean of bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)