श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.9.29 
तत्र आद्यं, यथा —
किं नः फणि-किशोरीणां त्वं पुष्कर-सदां सदा ।
मुरली-ध्वनिना नीवीं गोप-बाल विलुम्पसि ॥४.९.२९॥
 
 
अनुवाद
अनुपयुक्त वचन: "हे शिशु ग्वाल! आप अपनी बाँसुरी की ध्वनि से कालिय देश में रहने वाली हम नागकन्याओं के बन्धन कैसे खोल देते हैं?"
 
Inappropriate words: "O young cowherd boy! How do you free us, the Naga girls, who live in the Kaliya country, from the bondage of our bondage with the sound of your flute?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)