vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस
»
लहर 9: रसाभास (रसों की अधूरी अभिव्यंजना)
»
श्लोक 1
श्लोक
4.9.1
पूर्वम् एवानुशिष्टेन विकला रस-लक्षणा ।
रसा एव रसाभासा रस-ज्ञैर् अनुकीर्तिताः ॥४.९.१॥
अनुवाद
जो रस प्रतीत होता है, किन्तु पूर्वोक्त लक्षणों से रहित है, उसे रस के ज्ञाता रसाभास कहते हैं।
That which appears to be Rasa but is devoid of the above mentioned characteristics is called Rasaabhasa by those who know Rasa.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×