श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 8: मैत्री-वैर-रस (संगत और असंगत रस)  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  4.8.58 
तडिद्-विलास-तरला नव-यौवन-सम्पदः ।
अद्यैव दूति तेन त्वं मया रमय माधवम् ॥४.८.५८॥
अत्रोज्ज्वलस्य शान्तेन ।
 
 
अनुवाद
मधुर रस के साथ शांत रस: "हे दूत! नव-प्रस्फुटित यौवन की शोभा बिजली की क्रीड़ा के समान चंचल होती है। अतः आज माधव को मेरे साथ आनंद मनाने की व्यवस्था कीजिए।"
 
Shanta Rasa with Madhura Rasa: "O messenger! The beauty of newly blossomed youth is as playful as the play of lightning. Therefore, arrange for Madhava to celebrate with me today."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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