श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 8: मैत्री-वैर-रस (संगत और असंगत रस)  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.8.16 
सुहृदा मिश्रणां सम्यग् आस्वादं कुरुते रसम् ॥४.८.१६॥
 
 
अनुवाद
“जब मैत्रीपूर्ण रस मिलते हैं, तो रस मधुर हो जाता है।”
 
“When friendly juices meet, the juice becomes sweet.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)