श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 8: मैत्री-वैर-रस (संगत और असंगत रस)  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.8.13 
भयानकस्य बीभत्सः करुणश् च सुहृद्-वरः ।
द्विषन्तु वीर-शृङ्गार-हास्य-रौद्राः प्रकीर्तिताः ॥४.८.१३॥
 
 
अनुवाद
"भयानक-रस के लिए बीभत्स और करुणा-रस अनुकूल हैं। वीर, मधुर, हास्य और रौद्र प्रतिकूल हैं।"
 
"Bibhatsa and Karuna Rasas are suitable for Bhayanak Rasa. Veera, Madhura, Hasya and Raudra are unsuitable for it."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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