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श्लोक 4.8.12  |
रौद्रस्य करुणः प्रोक्तो वीरश् चापि सुहृद्-वरः ।
प्रतिपक्षस् तु हास्ये’स्य शृङ्गारो भीषणो’पि च ॥४.८.१२॥ |
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| अनुवाद |
| "करुण और वीर-रस रौद्र-रस के लिए अनुकूल हैं। हास्य, मधुर और भयानक-रस शत्रु हैं।" |
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| "Karun and Veera-rasas are favorable to Raudra-rasa. Hasya, Madhuri and Bhayanak-rasas are enemies." |
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