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श्लोक 4.7.9  |
अथ प्रायिकी —
अमेध्य-पूत्य्-अनुभवात् सर्वेषाम् एव सर्वतः ।
या प्रायो जायते सेयं जुगुप्सा प्रायिकी मता ॥४.७.९॥ |
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| अनुवाद |
| “सभी प्रकार के लोगों में और सभी प्रकार की परिस्थितियों में अशुद्ध या दुर्गंधयुक्त वस्तुओं से उत्पन्न होने वाली घृणा को प्रायिकि (सामान्य) घृणा कहते हैं।” |
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| “The aversion to impure or foul-smelling objects arising in all kinds of people and under all kinds of circumstances is called general aversion.” |
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