“शिशुपाल जैसे शत्रुओं का अंतर्निहित क्रोध, रति से रहित होने के कारण, भक्ति-रस नहीं बनता।”
“The inherent anger of enemies like Shishupal, being devoid of passion, does not become devotional.”
इति श्री-श्री-भक्ति-रसामृत-सिन्धाव् उत्तर-विभागे
गौण-भक्ति-रस-निरूपणे रौद्र-भक्ति-रस-लहरी पञ्चमी ॥
"इस प्रकार श्री भक्ति-रसामृत-सिंधु के उत्तरी महासागर में 'रौद्र-रस' से संबंधित पांचवीं लहर समाप्त होती है।"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥