श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 5: रौद्र-रस (क्रोध)  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.5.18 
अथ हरेर् अहितः —
अहितस् तु हरेस् तस्य वैरि-पक्षो निगद्यते ॥४.५.१८॥
 
 
अनुवाद
“जो लोग कृष्ण के शत्रु हैं, उन्हें कृष्ण का शत्रु कहा जाता है।”
 
“Those who are enemies of Krishna are called enemies of Krishna.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)