श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 2: अद्भुत-रस (विस्मय)  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.2.7 
यथोक्तं श्री-दशमे (१०.६९.२) —
चित्रं बतैतद् एकेन वपुषा युगपत् पृथक् ।
गृहेषु द्व्य्-अष्ट-साहस्रं स्त्रिय एक उदावहत् ॥४.२.७॥
 
 
अनुवाद
श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध [10.69.2] में इसका वर्णन है: "यह बहुत आश्चर्यजनक है कि एक ही शरीर में भगवान कृष्ण ने एक साथ सोलह हजार स्त्रियों से विवाह किया, प्रत्येक एक अलग महल में।"
 
It is described in the tenth canto [10.69.2] of the Srimad Bhagavata: “It is very astonishing that in one body Lord Krishna married sixteen thousand women simultaneously, each in a separate palace.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)