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श्लोक 4.1.26  |
अतिहसितम् —
सहस्र-तालं क्षिप्ताङ्गं तच् चातिहसितं विदुः ॥४.१.२६॥ |
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| अनुवाद |
| “हाथों से ताली बजाना और शरीर को झुकाना, दोनों के साथ हंसी को अतिहंसी (अत्यधिक हंसी) कहा जाता है।” |
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| “Laughter accompanied by both clapping of hands and bowing of the body is called atihansi (excessive laughter).” |
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