श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 1: हास्य-रस (हंसी का परमानंद)  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.1.24 
अपहसितम् —
तच् चापहसितं साश्रु-लोचनं कम्पितांसकम् ॥४.१.२४॥
 
 
अनुवाद
“आँखों में आँसू और कंधे हिलाते हुए हँसी को अपहासित (अनियंत्रित हँसी) कहा जाता है।”
 
“Laughter with tears in the eyes and shaking shoulders is called aphasita (uncontrollable laughter).”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd