श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 1: हास्य-रस (हंसी का परमानंद)  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.1.22 
अवहसितम् —
तच् चावहसितं फुल्ल-नासं कुञ्चित-लोचनम् ॥४.१.२२॥
 
 
अनुवाद
“जब नाक फूल जाती है और आंखें सिकुड़ जाती हैं, तो उसे अवहासिट (तीव्र हंसी) कहा जाता है।”
 
“When the nose flares and the eyes narrow, it is called avahasit (loud laughter).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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