श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 1: हास्य-रस (हंसी का परमानंद)  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.1.20 
विहसितम् —
स-स्वनं दृष्ट-दशनं भवेद् विहसितं तु तत् ॥४.१.२०॥
 
 
अनुवाद
“जब हँसी की आवाजें सुनाई देती हैं और दाँत दिखाई देते हैं तो उसे विहसित (श्रव्य हँसी) कहा जाता है।”
 
“When laughter sounds are heard and teeth are visible, it is called vihasita (audible laughter).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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