श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 4: उत्तरी विभाग: गौण भक्ति रस  »  लहर 1: हास्य-रस (हंसी का परमानंद)  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.1.18 
हसितम् —
तद् एव दर-संलक्ष्य-दन्ताग्रं हसितं भवेत् ॥४.१.१८॥
 
 
अनुवाद
“जब दांत थोड़े से दिखाई देते हैं, तो उसे हसीता (मुस्कान) कहा जाता है।”
 
“When the teeth are slightly visible, it is called hasita (smile).”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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