श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.1.38 
शान्तो द्विधैष पारोक्ष्य-साक्षात्कार-विभेदतः ॥३.१.३८॥
 
 
अनुवाद
“शान्त रस दो प्रकार का होता है: परोक्ष्य (अदृश्य) और साक्षात्कार (दृश्य)।”
 
“Shanta Rasa is of two types: Parokshya (invisible) and Samparksha (visible).”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)