श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  3.1.30 
अथ सात्त्विकाः —
रोमाञ्च-स्वेद-कम्पाद्याः सात्त्विकाः प्रलयं विना ॥३.१.३०॥
 
 
अनुवाद
सात्विक भाव: "शांत रस में सभी सात्विक भाव होते हैं, जैसे रोंगटे खड़े हो जाना, पसीना आना और शरीर का कांपना, केवल बेहोशी को छोड़कर।"
 
Satvik Bhaav: "Shanta Rasa has all the Satvik Bhaavs, such as goosebumps, sweating and trembling of the body, except fainting."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)