“शीत-अनुभाव [बीआरएस 2.2.3 में वर्णित] और अन्य अनुभव जो शांत-भक्त दास-भक्तों और अन्य लोगों के साथ साझा करते हैं, वे हैं जम्हाई लेना, शरीर को खींचना, भक्तों को निर्देश देना, भगवान को प्रणाम करना और उनकी स्तुति का पाठ करना।”
“The śita-anubhava [described in BRS 2.2.3] and other experiences that śita-bhaktas share with das-bhaktas and others are yawning, stretching the body, instructing devotees, saluting the Lord, and reciting His praises.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥