श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 3: पश्चिमी विभाग: मुख्य भक्ति रस  »  लहर 1: शांत-रस (ईश्वर का शांत प्रेम)  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.1.13 
तत्र रूपम् —
ते पञ्चषाब्द-बालाभाश् चत्वारस् तेजसोज्ज्वलाः ।
गौराङ्गा वात-वसनाः प्रायेण सहचारिणः ॥३.१.१३॥
 
 
अनुवाद
उनके रूप: "चारों कुमार पाँच वर्ष के बालक हैं, जो तेज से चमक रहे हैं, सुनहरे रंग के हैं और लगभग नग्न हैं। वे साथ-साथ विचरण करते हैं।"
 
Their appearance: "The four Kumaras are five-year-old boys, shining with brilliance, golden in complexion and almost naked. They wander about together."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)