एवं पूर्वोक्तवत्-सिद्धं विदुः क्रोध-रतिं बुधाः ।
द्विधासौ कृष्ण-तद्-वैरि-भावत्वेन कीर्तिता ॥२.५.६४॥
अनुवाद
"क्रोध-रति क्रोध से उसी प्रकार उत्पन्न होती है जैसे हँस-रति हँस से उत्पन्न होती है। इसके दो प्रकार हैं: जहाँ क्रोध का उद्दीपन कृष्ण हैं और जहाँ उद्दीपन कृष्ण का शत्रु है।"
"Krodha-rati arises from anger just as hansa-rati arises from laughter. There are two types: where the stimulus of anger is Krishna and where the stimulus is Krishna's enemy."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥