हासोत्तरा रतिर् या स्यात् सा हास-रतिर् उच्यते ।
एवं विस्मय-रत्य्-आद्या विज्ञेया रतयश् च षट् ॥२.५.४३॥
अनुवाद
"जब किसी मुख्य-रति (जो परार्थ बन जाती है) पर हंस की प्रधानता होती है, तो उसे हंस-रति कहते हैं। अन्य छह गौण रतियों को भी इसी प्रकार समझना चाहिए।"
"When a main passion (which becomes altruistic) is dominated by the samsa, it is called samsa-rati. The other six secondary passions should also be understood in the same way."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥