तथा च नाट्यादौ —
करुणादाव् अपि रसे जायते यत् परं सुखम् ।
सुचेतसाम् अनुभवः प्रमाणं तत्र केवलम् ॥२.५.१२५॥
अनुवाद
नाट्यशास्त्र के कथन में इसकी पुष्टि की गई है: "करुणा और अन्य 'नकारात्मक' रसों से सुख प्राप्त होता है, इसका पूर्ण प्रमाण कोमल हृदय वाले भक्तों का अनुभव है।"
This is confirmed in the statement of the Natyashastra: "The experience of tender-hearted devotees is the full proof that compassion and other 'negative' rasas bring happiness."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥