श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 5: स्थायी-भाव (स्थायी आनंदवर्धक भाव)  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  2.5.117 
एवं भक्ति-रसो भेदाद् द्वयोर् द्वादशधोच्यते ।
वस्तुतस् तु पुराणादौ पञ्चधैव विलोक्यते ॥२.५.११७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कुल बारह प्राथमिक और द्वितीयक रस हैं, लेकिन पुराणों में केवल पाँच का ही उल्लेख है।
 
Thus there are a total of twelve primary and secondary rasas, but only five are mentioned in the Puranas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)