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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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श्लोक 191
श्लोक
2.4.191
इति भावास् त्रयस्-त्रिंशत् कथिता व्यभिचारिणः ।
श्रेष्ठ-मध्य-कनिष्ठेषु वर्णनीया यथोचितम् ॥२.४.१९१॥
अनुवाद
इस प्रकार तैंतीस व्यवहारचारी भावों का वर्णन किया गया है। इन्हें उनकी स्थिति के अनुसार श्रेष्ठ, मध्यम और निम्नतर बताया जाना चाहिए।
Thus, thirty-three practical emotions have been described. These should be classified as superior, medium, and inferior according to their status.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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