श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 3: सात्त्विक-भाव (अस्वेच्छित आनंदवर्धक अभिव्यंजनाएँ)  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  2.3.47 
अथ वैवर्ण्यम् —
विषाद-रोष-भीत्य्-आदेर् वैवर्ण्यं वर्ण-विक्रिया ।
भाव-ज्ञैर् अत्र मालिन्य-कार्श्याद्याः परिकीर्तिताः ॥२.३.४७॥
 
 
अनुवाद
रंग परिवर्तन: “दुःख, क्रोध या भय के कारण किसी व्यक्ति के रंग (वर्ण-विक्रिया) में परिवर्तन को वैवर्ण्य या रंग परिवर्तन कहा जाता है।”
 
Colour change: “The change in a person's colour (varna-vikriya) due to sadness, anger or fear is called vaivarmanya or colour change.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)