श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 3: सात्त्विक-भाव (अस्वेच्छित आनंदवर्धक अभिव्यंजनाएँ)  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  2.3.37 
अथ स्वर-भेदः —
विसाद-विस्मयामर्ष-हर्ष-भीत्य्-आदि-सम्भवम् ।
वैस्वर्यं स्वर-भेदः स्याद् एष गद्गदिकादिकृत् ॥२.३.३७॥
 
 
अनुवाद
स्वर का अवरुद्ध होना: "स्वरभेदन स्वर-भेद कहलाता है। यह दुःख, विस्मय, क्रोध, हर्ष और भय से उत्पन्न होता है। इससे बोलने में अकड़न होती है।"
 
Blocking of the voice: "Blocking of the voice is called swara-bheda. It is caused by sadness, surprise, anger, joy and fear. It causes stiffness in speech."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)