श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  2.1.98 
(१९) देश-काल-सुपात्रज्ञः —
देश-काल-सुपात्रज्ञस् तत्-तद्-योग्य-क्रिया-कृतिः ॥२.१.९८॥॥
 
 
अनुवाद
(19) देश-काल-सुपात्रज्ञ: देश, काल और पुरुष का ज्ञाता - "देश, काल और पुरुष का ज्ञाता वह है जो समय, स्थान और पुरुष के अनुकूल कर्म करता है।"
 
(19) Desha-Kal-Supatragya: Knower of place, time and person - "Knower of place, time and person is one who performs actions in accordance with time, place and person."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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