vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
»
लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
»
श्लोक 94
श्लोक
2.1.94
(१८) सुदृढ-व्रतः —
प्रतिज्ञा-नियमौ यस्य सत्यौ स सुदृढ-व्रतः ॥२.१.९४॥॥
अनुवाद
(18) शुद्धव्रत: व्रत में दृढ़ - "जो व्यक्ति अपने वचनों और अपनी शाश्वत प्रतिज्ञाओं के प्रति सच्चा है, उसे व्रत में दृढ़ कहा जाता है।"
(18) Shuddhavrata: Firm in vows - "A person who is true to his words and his eternal vows is said to be firm in vows."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×