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श्री भक्ति रसामृत सिंधु
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सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
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लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
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श्लोक 70
श्लोक
2.1.70
(९) प्रियंवदः —
जने कृतापराधे’पि सान्त्व-वादी प्रियंवदः ॥२.१.७०॥॥
अनुवाद
(9) प्रियंवदः: प्रसन्नतापूर्वक बोलना - "प्रसन्नतापूर्वक बोलने का अर्थ है, उन लोगों से भी प्रसन्नतापूर्वक बात करना जिन्होंने अपमान किया हो।"
(9) Priyamvadah: Speaking cheerfully - "Speaking cheerfully means speaking cheerfully even to those who have insulted you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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