श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  2.1.67 
(८) सत्य-वाक्यः —
स्यान् नानृतं वचो यस्य सत्य-वाक्यः स कथ्यते ॥२.१.६७॥॥
 
 
अनुवाद
(8) सत्य-वाक्यः: सत्यवक्ता - "जिस व्यक्ति के वचन कभी झूठे नहीं होते, उसे सत्यवक्ता कहा जाता है।"
 
(8) Satya-vakyah: Truthful person - "A person whose words are never false is called a truthful person."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)