श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  2.1.58 
प्रभावः —
प्रभावः सर्वजित्-स्थितिः ॥२.१.५८॥
 
 
अनुवाद
“प्रभाव से तात्पर्य अन्य सभी पर विजय प्राप्त करने की उसकी क्षमता से है।”
 
“Influence refers to his ability to prevail over all others.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)