श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.1.52 
(३) रुचिरः —
सौन्दर्येण दृग्-आनन्द-कारी रुचिर उच्यते ॥२.१.५२॥॥
 
 
अनुवाद
(3) रुचिराः का अर्थ है “वह अपनी सुंदरता से आंखों को आनंद देता है।”
 
(3) Ruchira means “She gives pleasure to the eyes with her beauty.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)