श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  2.1.51 
यथा —
करयोः कमलं तथा रथाङ्गं
स्फुट-रेखामयम् आत्मजस्य पश्य ।
पद-पल्लवयोश् च वल्लवेन्द्र
ध्वज-वज्राङ्कुश-मीन-पङ्कजानि ॥२.१.५१॥
 
 
अनुवाद
"हे ग्वालराज! देखो, तुम्हारे बालक के हाथों में कमल और चक्र की स्पष्ट रेखाएँ हैं, तथा उसके चरणों में ध्वजा, वज्र, अंकुश, मछली और कमल के चिह्न हैं।"
 
"O cowherd king! Look, your child has clear lines of lotus and wheel in his hands, and on his feet are the marks of flag, thunderbolt, goad, fish and lotus."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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