श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.1.50 
अङ्कोत्थम् —
रेखामयं रथाङ्गादि स्याद् अङ्कोत्थं करादिषु ॥२.१.५०॥
 
 
अनुवाद
“अंकोत्तम का तात्पर्य हाथों या पैरों पर चक्र जैसी रेखाओं से है।”
 
“Ankottam refers to the circle-like lines on the hands or feet.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)