vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
»
लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
»
श्लोक 48
श्लोक
2.1.48
तत्र गुणोत्थम् —
गुणोत्थं स्याद् गुणैर् योगो रक्तता-तुङ्गतादिभिः ॥२.१.४८॥
अनुवाद
“गुणोत्तम का तात्पर्य किसी अंग की लालिमा या ऊंचाई जैसे गुणों से है।”
“Gunanottam refers to the qualities like redness or height of an organ.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×