श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 384
 
 
श्लोक  2.1.384 
अथ तद्-वासरो, यथा —
अद्भुता बहवः सन्तु भगवत्-पर्व-वासराः ।
आमोदयति मां धन्या कृष्ण-भाद्रपदाष्टमी ॥२.१.३८४॥
 
 
अनुवाद
भगवान के स्मरणोत्सव के दिनों का एक उदाहरण: "यहाँ भगवान के स्मरणोत्सव के कई दिन हैं। हालाँकि, भाद्र (जन्माष्टमी) के महीने में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मुझे बहुत आनंद देती है।"
 
An example of the days of commemoration of the Lord: "There are many days of commemoration of the Lord here. However, the Ashtami tithi of the Krishna Paksha in the month of Bhadra (Janmashtami) gives me great joy."
 
इति श्री-श्री-भक्ति-रसामृत-सिन्धौ दक्षिण-विभागे
भक्ति-रस-सामान्य-निरूपणे विभाव-लहरी प्रथमा ॥
"इस प्रकार श्री भक्ति-रसामृत-सिंधु के दक्षिणी महासागर में 'विभाव' से संबंधित पहली लहर समाप्त होती है।"
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)