श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 376
 
 
श्लोक  2.1.376 
अथ कम्बुः —
कम्बुस् तु दक्षिणावर्तः पाञ्चजन्यतयोच्यते ॥२.१.३७६॥
 
 
अनुवाद
शंख: “जिस शंख का घुमाव दाहिनी ओर होता है उसे पंचजन्य कहा जाता है।”
 
Conch: “The conch whose curve is towards the right is called Panchajanya.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)