vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री भक्ति रसामृत सिंधु
»
सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस
»
लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)
»
श्लोक 376
श्लोक
2.1.376
अथ कम्बुः —
कम्बुस् तु दक्षिणावर्तः पाञ्चजन्यतयोच्यते ॥२.१.३७६॥
अनुवाद
शंख: “जिस शंख का घुमाव दाहिनी ओर होता है उसे पंचजन्य कहा जाता है।”
Conch: “The conch whose curve is towards the right is called Panchajanya.”
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd