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श्लोक 2.1.373  |
अथ शृङ्गम् —
शृङ्गं तु गवलं हेम-निबद्धाग्रिम-पश्चिमम् ।
रत्न-जाल-स्फुरन्-मध्यं मन्द्र-घोषाभिधं स्मृतम् ॥२.१.३७३॥ |
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| अनुवाद |
| सींग: "जंगली भैंसे का सींग जिसके दोनों सिरों पर सोना चढ़ा होता है और बीच में रत्न जड़े होते हैं, उसे मंदराघोष (गड़गड़ाहट) कहा जाता है।" |
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| Horn: "The horn of the wild buffalo with gold plated on both ends and gems embedded in the middle is called Mandraghosha (thunder)." |
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