श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 372
 
 
श्लोक  2.1.372 
गोपानां वल्लभा सेयं वंशुलीति च विश्रुता ।
क्रमान् मणिमयी हैमी वैणवीति त्रिधा च सा ॥२.१.३७२॥
 
 
अनुवाद
"आनंदिनी ग्वालों की प्रिय होती है और इसे वंशुली भी कहते हैं। वंशी क्रमशः रत्नों, सोने या बाँस से बनी होती हैं।"
 
"Anandini is a favorite of cowherds and is also called Vanshuli. The flutes are made of gems, gold, or bamboo, respectively."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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