श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 368-369
 
 
श्लोक  2.1.368-369 
वंशी —
अर्धाङ्गुलान्तरोन्मानं तारादि-विवराष्टकम् ।
ततः सार्धाङ्गुलाद् यत्र मुख-रन्ध्रं तथाङ्गुलम् ॥२.१.३६८॥
शिरो वेदाङ्गुलं पुच्छं त्र्य्-अङ्गुलं सा तु वंशिका ।
नव-रन्ध्रा स्मृता सप्त-दशाङ्गुल-मिता बुधैः ॥२.१.३६९॥
 
 
अनुवाद
"वंशिका सत्रह अंगुल लंबी (12.75 इंच) होती है और इसमें नौ छेद होते हैं। स्वर बजाने के लिए आठ छेदों का व्यास आधा अंगुल होता है और उनके बीच आधी अंगुल की दूरी होती है। फूंक मारने के लिए एक छेद आठवें छेद से डेढ़ अंगुल की दूरी पर होता है और उसका व्यास एक अंगुल होता है। बाँसुरी के शीर्ष पर चार अंगुल और सिरे पर तीन अंगुल का स्थान शेष रहता है।"
 
"The flute is seventeen fingers long (12.75 inches) and has nine holes. The eight holes for playing notes are half a finger in diameter and are half a finger apart. The blowing hole is one and a half fingers away from the eighth hole and is one finger in diameter. There is four fingers of space at the top of the flute and three fingers at the end."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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