श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 359
 
 
श्लोक  2.1.359 
अथ मण्डनम् —
किरीटं कुण्डले हारश् चतुष्की वलयोर्मयः ।
केयूर-नूपुराद्यं च रत्न-मण्डनम् उच्यते ॥२.१.३५९॥
 
 
अनुवाद
“रत्न आभूषणों (मण्डनम) में मुकुट, झुमके, ब्रोच, कंगन, अंगूठियां, बाजूबंद और पायल शामिल हैं।”
 
“Gemstone ornaments (mandanam) include crowns, earrings, brooches, bracelets, rings, armlets and anklets.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)