श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 343
 
 
श्लोक  2.1.343 
चेष्टा —
चेष्टा रासादि-लीलाः स्युस् तथा दुष्ट-वधादयः ॥२.१.३४३॥
 
 
अनुवाद
“रासलीला, राक्षसों का वध और अन्य लीलाएँ चेष्टा कहलाती हैं।”
 
“Raslila, killing of demons and other pastimes are called Cheshta.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)