श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 342
 
 
श्लोक  2.1.342 
ये नायक-प्रकरणे वाचिका मानसास् तथा ।
गुणाः प्रोक्तान्त एवात्र ज्ञेया उद्दीपना बुधः ॥२.१.३४२॥
 
 
अनुवाद
"बुद्धिमान लोग समझते हैं कि नायक का वर्णन करने वाले इस खंड में पहले से ही वर्णित सभी मौखिक और मानसिक गुण उद्दीपन हैं।"
 
"Wise people understand that all the verbal and mental qualities already mentioned in this section describing the hero are stimuli."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)