श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  2.1.32 
एत एव गुणाः प्रायो धर्माय वन-मालिनः ।
पृथिव्या प्रथम-स्कन्धे प्रथयाञ्चक्रिरे स्फुटम् ॥२.१.३२॥
 
 
अनुवाद
“श्रीमद्भागवतम् के प्रथम स्कन्ध [1.16.26-29] में पृथ्वी भी धर्म के देवता के समक्ष कृष्ण के गुणों का स्पष्ट और विस्तृत वर्णन करती है।”
 
“In the first canto of the Srimad Bhagavatam [1.16.26-29] the earth also clearly and extensively describes the qualities of Krishna before the Lord of Dharma.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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