श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 317
 
 
श्लोक  2.1.317 
खरतात्र नखाग्राणां धनुर् आन्दोलिता भ्रुवोः ।
रदानां रञ्जनं राग-चूर्णैर् इत्य् आदि चेष्टितम् ॥२.१.३१७॥
 
 
अनुवाद
"युवावस्था के आरंभ में, उनके कार्यों में उनके नाखूनों को तेज करना, उनकी धनुष जैसी भौंहें तानना और दांतों को रंगों से रंगना शामिल है।"
 
"At the beginning of puberty, their activities include sharpening their nails, plucking their bow-shaped eyebrows, and painting their teeth with colors."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)