श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 315
 
 
श्लोक  2.1.315 
वैजयन्ती-शिखण्डादि-नट-प्रवर-वेशता ।
वंशी-मधुरिमा वस्त्र-शोभा चात्र परिच्छदः ॥२.१.३१५॥
 
 
अनुवाद
इस अवधि के दौरान उनकी विशिष्ट साज-सज्जा वैजयंती माला, मोर पंख, नर्तकी की वेशभूषा, उनकी बांसुरी वादन की मधुरता और उनकी पोशाक की चमक है।
 
Her characteristic adornments during this period are Vaijayanti garland, peacock feathers, dancer's costume, the sweetness of her flute playing and the brilliance of her attire.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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