श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 304
 
 
श्लोक  2.1.304 
तत्र कायिकाः —
वयः-सौन्दर्य-रूपाणि कायिकामृदुतादयः ॥२.१.३०४॥
 
 
अनुवाद
"शारीरिक गुण हैं आयु, सौंदर्य, रूप और शरीर की कोमलता जैसी चीजें।"
 
"Physical qualities are things like age, beauty, form and softness of the body."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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