श्री भक्ति रसामृत सिंधु  »  सागर 2: दक्षिणी विभाग: सामान्य भक्ति रस  »  लहर 1: विभाव (आनंदवर्धक अवस्थाएँ)  »  श्लोक 303
 
 
श्लोक  2.1.303 
तत्र गुणाः —
गुणास् तु त्रिविधाः प्रोक्ताः काय-वाङ्-मानसाश्रयाः ॥२.१.३०३॥
 
 
अनुवाद
“गुण तीन प्रकार के होते हैं: शारीरिक, मानसिक और मौखिक।”
 
“There are three kinds of qualities: physical, mental, and verbal.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)