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श्लोक 300
श्लोक
2.1.300
भक्तास् तु कीर्तिताः शान्तास् तथा दास-सुतादयः ।
सखायो गुरु-वर्गाश् च प्रेयस्यश् चेति पञ्चधा ॥२.१.३००॥
अनुवाद
"कृष्ण के भक्त पाँच प्रकार के होते हैं: शांत रस में रहने वाले, सेवक और पुत्र, मित्र, वृद्ध और प्रेमी।"
"Krishna's devotees are of five kinds: those in the tranquil mood, servants and sons, friends, elders and lovers."
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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